हड़पसर में 1800 करोड़ रुपये का सरकारी जमीन का सनसनीखेज घोटाले का अमोल तुपे ने किया पर्दाफ़ाश; क्रांति शेतकरी संगठन ने दी आंदोलन की चेतावनी
हड़पसर, अगस्त (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
पुणे शहर के हड़पसर परिसर में 1800 करोड़ रुपये की सरकारी ज़मीन के कथित घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। क्रांति शेतकरी संगठन के संस्थापक अध्यक्ष अमोल नाना यशवंत तुपे ने पूरे मामले का पर्दाफ़ाश करते हुए सरकारी अदालत में एक सार्वजनिक बयान दर्ज कराया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े बिल्डरों को फ़ायदा हो रहा है।
तदनुसार, मंजरी बुद्रुक गांव के स.नं. 180 से 184 तक कुल 73 हेक्टेयर भूमि सिंचाई विभाग के स्वामित्व में है और वर्ष 1985 से 2015 तक सामूहिक खेती के लिए सुभाष सामुदायिक सहकारी शेतकी संघ लि. को किराए पट्टे पर दिया गया था। हालांकि, किराए पट्टे की समाप्ति के बावजूद, उक्त संगठन ने बिना किसी नए वैध समझौते के एक निजी कंपनी, आदिदेव कंस्ट्रक्शन एलएलपी को जमीन बेचने के लिए एक अवैध प्रस्ताव पारित किया। इस लेन-देन में विभिन्न सरकारी अधिकारी, सहकारी समितियों के अधिकारी, बिल्डरों और फर्जी कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं, ऐसा गंभीर आरोप लगाया गया है। इस भूमि का सरकारी मूल्यांकन लगभग 306 करोड़ रुपये है और बाजार मूल्य 1800 करोड़ रुपये तक जाता है। इतनी अधिक कीमतवाली सरकारी भूमि का कब्जा बिना किसी नीलामी या किसी वैध प्रक्रिया के अवैध रूप से स्थानांतरित कर दिया गया है।
क्रांति शेतकरी संगठन का कहना है कि इस कथित घोटाले के माध्यम से 3.30 करोड़ का नकद गबन, 42 करोड़ का टीडीआर गबन और 16 करोड़ की अवैध बिक्री की गई है। इस संबंध में संगठन ने मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, सहकारिता मंत्री, सिंचाई मंत्री और पुणे जिले के पालकमंत्री को निवेदन भेजकर दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की मांग की है।
सरकारी भूमि का उपयोग नागरिकों के हित के लिए- अस्पतालों, खेल के मैदानों व सामाजिक परियोजनाओं के लाभ के लिए किया जाना चाहिए। ऐसा दृढ़ रुख अपनाते हुए अमोल तुपे ने इस मुद्दे को अदालत में ले जाने की भी चेतावनी दी है। इस भ्रष्टाचार मामले में दोषियों की तत्काल जांच करते हुए दोषियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धन शोधन अधिनियम व सहकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
यह भी मांग की है कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून, धन शोधन अधिनियम और सहकारी अधिनियम कानून के तहत अपराधिक मामले दायर किए जाने चाहिए। यह मांग भी उन्होंने की। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि सरकार समय पर इस पर ध्यान नहीं देती है तो क्रांति शेतकरी संगठन सड़कों पर उतरकर जोरदार आंदोलन शुरू करेगा।
इस संबंध में सुभाष सामुदायिक सोसायटी के चेयरमैन किशोर टिलेकर से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि उक्त संगठन की स्थापना 13/02/1948 को हुई थी तथा पिछले 77 वर्षों से संगठन उक्त कृषि भूमि पर खेती कर अनेक परिवारों का भरण-पोषण कर रहा है। उक्त कृषि भूमि को समय-समय पर शासन द्वारा विस्तारित किया गया है तथा संस्था द्वारा उक्त भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न होने देते हुए सम्पूर्ण भूमि पर कृषि कार्य किया जा रहा है। यद्यपि, अवधि विस्तार हेतु सम्पूर्ण प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है तथा किश्त राशि के भुगतान एवं अनुबंध पर हस्ताक्षर के संबंध में संबंधित विभाग द्वारा संस्था के साथ पत्राचार भी किया जा चुका है। हालाँकि, भूमि घोटाले के आरोप पूरी तरह से झूठे हैं और कोई लेनदेन नहीं हुआ है। साथ ही कुछ लोग बिना किसी कारण के संगठन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। टिलेकर ने बताया कि संगठन का उद्देश्य भूमि पर खेती करना है और वहां किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया गया है।
नए गांवों को नगर निगम में शामिल करते समय, विकास योजनाओं में किसानों की ज़मीन को आरक्षित करके अन्याय किया जा रहा है। इसके बजाय, सरकार को किराए पट्टे पर दी गई, लेकिन अप्रयुक्त ज़मीन को अपने कब्ज़े में लेना चाहिए और ससून अस्पताल की तर्ज़ पर आधुनिक अस्पताल, खेल के मैदान, बगीचे, स्कूल और कॉलेज जैसी नागरिक पहल शुरू करनी चाहिए।