पुणे शहर में अपराध रोकने के लिए सरकार के सर्वतोपरी प्रयास : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
विधि संघर्षित बालकों के लिए ‘दिशा’ कार्यक्रम की शुरुआत
मुंबई, मार्च (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
पुणे शहर में कोयता (फरसा) लेकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की 9 घटनाएं सामने आई हैं। इन मामलों में 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से 13 आरोपी नाबालिग (विधि संघर्षित बालक) हैं। हालांकि, पुणे में किसी भी ‘कोयता गैंग‘ का कोई अस्तित्व नहीं है, लेकिन इस तरह के अपराधों में 15-16 साल के नाबालिगों की संलिप्तता पाई गई है। इन विधि संघर्षित बालकों के पुनर्वास के लिए सरकार ने ‘दिशा’ कार्यक्रम शुरू किया है। पुणे में अपराध नियंत्रण के लिए सरकार सभी आवश्यक कदम उठा रही है, ऐसा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा के प्रश्नोत्तर सत्र में बताया।
इस विषय को विधायक बापू पठारे ने उठाया, जिसमें विधायक चेतन तुपे और सिद्धार्थ शिरोळे ने चर्चा में भाग लिया।
पुणे में सात नए पुलिस स्टेशन को मंजूरी
मुख्यमंत्री फडणवीस ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि ‘दिशा’ कार्यक्रम पुणे में विधि संघर्षित बालकों के पुनर्वास और सुधार के लिए कार्यरत है। इस कार्यक्रम के माध्यम से कुछ नाबालिगों का पहले ही पुनर्वास किया जा चुका है।
पुणे शहर में पुलिस स्टेशनों का क्षेत्र बहुत बड़ा होने के कारण अपराध नियंत्रण में कठिनाई हो रही थी। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने शहर में एक साथ सात नए पुलिस स्टेशन खोलने की मंजूरी दी है।
नए पुलिस स्टेशन निम्नलिखित स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे :
📍 बाणेर
📍 फुरसुंगी
📍 कालेपडल
📍 आलेफाटा
📍 खराडी
📍 वाघोली
📍 नांदेड फाटा
इन नए पुलिस स्टेशनों की स्थापना से अपराध नियंत्रण और अधिक प्रभावी होगा।
इसके अलावा, यह पाया गया है कि अपराधी, नाबालिगों का उपयोग गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए कर रहे हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अनुसार, अगर कोई सरगना नाबालिगों को अपराध के लिए उकसाता है, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। यदि यह सिद्ध हो जाता है कि कोई संगठित अपराध किसी बड़े अपराधी द्वारा नाबालिगों के माध्यम से करवाया गया है, तो उन अपराधियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
महाराष्ट्र में नशीली दवाओं के व्यापार और तस्करी पर कड़ी कार्रवाई
राज्य में नशीली दवाओं की बिक्री और तस्करी रोकने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं, जो एक रिकॉर्ड है। इसके अलावा, नाइजीरियाई ड्रग पैडलर्स पर भी सख्त कार्रवाई की गई है।
इंस्टाग्राम के जरिए नशीली दवाओं की बिक्री: यह पाया गया है कि नशीली दवाओं की बिक्री के लिए इंस्टाग्राम डीएम के जरिए ऑर्डर लिए जा रहे हैं।
कोरियर कंपनियों की सख्त जांच: कई कोरियर कंपनियों की जांच की गई है, जिनके माध्यम से ड्रग्स की डिलीवरी की जा रही थी। यदि किसी कोरियर कंपनी की संलिप्तता पाई गई, तो उस पर भी कानूनी कार्रवाई होगी।
पान ठेलों पर भी नजर: ऐसे पान ठेलों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, जो गुप्त रूप से नशीले पदार्थ बेच रहे हैं।
सीसीटीवी निगरानी प्रणाली को मजबूत किया जाएगा
विदेशी नागरिकों द्वारा नशीली दवाओं की तस्करी के मामलों में जब तक मामला सुलझ नहीं जाता, तब तक उन्हें निर्वासित (डिपोर्ट) नहीं किया जा सकता। लेकिन अदालत में दोष सिद्ध होते ही उन्हें तत्काल डिपोर्ट कर दिया जाएगा।
सरकार यह भी जांच कर रही है कि क्या अपराधियों को ट्रैक करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का उपयोग किया जा सकता है।
15-16 वर्ष के नाबालिग अपराधियों की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए, उनके मामलों की न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
पुणे शहर में अपराध नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सीसीटीवी निगरानी प्रणाली को मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा, सरकार यह भी समीक्षा कर रही है कि सीसीटीवी सिस्टम की मरम्मत और प्रबंधन की जिम्मेदारी किसी निजी एजेंसी को दी जा सकती है या नहीं।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र सरकार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में, पुणे शहर में नाबालिग अपराधियों, संगठित अपराध और नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है।
‘दिशा’ कार्यक्रम नाबालिग अपराधियों के पुनर्वास में मदद करेगा।
नए पुलिस स्टेशन और सख्त कानून अपराध पर नियंत्रण को और मजबूत करेंगे।
सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग से अपराधियों की सख्त निगरानी होगी।
पुणे शहर को अपराध मुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
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