हड़पसर, मई (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
परिवार में पति और पत्नी के बीच विवाद तेजी से बढ़ रहा है। इसका असर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है।
घर के बड़े-बुजुर्गों को भी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है, इसलिए पति-पत्नी के रिश्ते को समझना जरूरी है ताकि सही मायने में परिवार को बचाया जा सके और परिवार का कल्याण हो सके। यह विचार सेवानिवृत्त मुख्य परिवार न्यायाधीश डॉ. अरुणा फरसवाणी ने व्यक्त किए।

फैमिली वेलफेयर रिसर्च एंड ट्रेनिंग सोसाइटी का पहला परिवार कल्याण राष्ट्रीय सम्मेलन पुणे में हाल में संपन्न हुआ है, तब मुख्य अतिथि के रूप में वे बोल रही थीं। इस अवसर पर यहां यशवंतराव चव्हाण लॉ कॉलेज पुणे की प्रिंसिपल डॉ. शुभदा घोलप, महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ पुणे के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रफुल्ल कापसे, कानूनी सलाहकार एडवोकेट अरुंधति शिंदे, फैमिली वेलफेयर रिसर्च एंड ट्रेनिंग सोसाइटी की अध्यक्षा प्रतिभा शिंदे व अन्य प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

यशवंतराव चव्हाण लॉ कॉलेज पुणे की प्रिंसिपल डॉ. शुभदा घोलप ने कहा कि श्रम कानून, बाल कानून, कानून के प्रावधानों के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं का समाधान कैसे किया जाए तथा पारिवारिक सौहार्द्र, पति-पत्नी तथा परिवार के अन्य सदस्यों के बीच सौहार्द का माहौल कैसे बनाया जाए इस पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया ताकि परिवार का कल्याण हो सके।

फैमिली वेलफेयर रिसर्च एंड ट्रेनिंग सोसाइटी की अध्यक्षा प्रतिभा शिंदे ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य परिवार में कलह का कारण बनता है। परिवार के सदस्य एक-दूसरे को सही समय पर समझ नहीं पाते हैं। अपनी मानसिकता को सकारात्मक रखना परिवार में सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पति-पत्नी की शादी की उम्र बढ़ने के कारण पति-पत्नी के बीच झगड़े भी बढ़ने लगते हैं। माता-पिता को अपने बच्चों की शिक्षा और कैरियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

परिवार कल्याण राष्ट्रीय सम्मेलन का प्रास्ताविक करते हुए संस्था के संस्थापक- सचिव एड. संतोष शिंदे ने संस्था के कार्यों का विवरण देते हुए कार्यकारिणी एवं उद्देश्यों तथा भविष्य में संस्था के कार्य एवं दिशा-निर्देशों का परिचय दिया। कार्यक्रम का सूत्र-संचालन और आभार प्रदर्शन पवन अंभोरे ने किया।
परिवार कल्याण राष्ट्रीय सम्मेलन सफल बनाने के लिए संस्था के पदाधिकारीगण और सदस्यों ने अथक परिश्रम किया।

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