उच्चशिक्षित को नवप्रवर्तक, उद्यमी, व्यवसायी नेतृत्व बनना चाहिए : राज्यपाल रमेश बैस

उच्चशिक्षित को नवप्रवर्तक, उद्यमी, व्यवसायी नेतृत्व बनना चाहिए : राज्यपाल रमेश बैस

राज्यपाल रमेश बैस की उपस्थिति में सिम्बायोसिस अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का स्नातक समारोह संपन्न

पुणे, जून (जिमाका)
उच्चशिक्षित, स्नातकों को नौकरी खोजने के बजाय नवप्रवर्तक, उद्यमी, व्यापारिक नेतृत्व और स्टार्टअप निर्माता बनना चाहिए। गरीबी, वंचितता, युद्ध, अस्थिरता आदि के कारण समाज की परिधि पर जीनेवाले उन लोगों पर भी विचार करें। यह अपील राज्यपाल रमेश बैस ने की।


सिम्बायोसिस अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय लवले में अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के स्नातक समारोह में श्री रमेश बैस बोल रहे। यहां सिम्बायोसिस के अध्यक्ष व संस्थापक साथ ही सिम्बायोसिस अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शां. ब. मुजुमदार, सिम्बायोसिस की प्रधान संचालिका तथा विश्वविद्यालय की प्र- कुलगुरू डॉ. विद्या येरवडेकर, कुलगुरू डॉ. रामकृष्णन रमण, सिम्बायोसिस अंतर्राष्ट्रीय छात्र परिषद के अध्यक्ष बेबुकर सेक्का आदि उपस्थित थे।

स्नातकों को नौकरी खोज करनेवालों के बजाए रोजगार सृजन निर्माता बनना चाहिए यह संदेश देते हुए राज्यपाल ने आगे कहा कि हम अपने देश में गरीबी और असमानता को खत्म करने के लिए व्यक्तिगत रूप से और अपने संस्थानों के माध्यम से क्या कर सकते हैं, हमें इस बारे में सोचना चाहिए।


स्नातकों को भी सार्वजनिक सेवा क्षेत्र में शामिल होने पर विचार करना चाहिए। सार्वजनिक सेवा के माध्यम से बेहतर दुनिया बनाने के लिए समाज, अपने लोगों और अपने राष्ट्र के लिए उत्कृष्ट योगदान देने की अपील भी उन्होंने की।
सिम्बायोसिस देश के सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थानों में से एक बनकर उभरा है और यह ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का एक बेहतरीन उदाहरण है क्योंकि कई देशों से छात्र यहां शिक्षा के लिए आते हैं। बड़ी संख्या में महिला स्नातकों को देखकर आनेवाले कुछ वर्षों में उच्च शिक्षा और अनुसंधान के लिए भारत में आनेवाली महिला छात्रों की संख्या में और वृद्धि होगी। यह उम्मीद श्री बैस ने व्यक्त की।

श्री बैस ने आगे बोलते हुए कहा कि तीस साल बाद पुणे एक सूचना प्रौद्योगिकी शहर बन गया है। आज यह हजारों नौकरियों का सृजन करनेवाला आईटी हब बन गया है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि स्नातक नए कौशल और हस्तांतरणीय क्षमता सीखें। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजन्स) और मशीन लर्निंग तकनीक के कारण कई नौकरियों को अप्रचलित हो सकती है, लेकिन यह कई नई नौकरियों के अवसर भी पैदा कर रही है। जो स्नातक आज इस क्षेत्र से परिचित हैं, उन्हें निश्चित रूप से नौकरियों में अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

आप सिर्फ किसी देश के नागरिक नहीं बल्कि विश्व के नागरिक हैं। एक वैश्विक नागरिक के रूप में दुनिया के सामने आनेवाली समस्याओं के बारे में जागरूक होना चाहिए। ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन अब केवल अकादमिक चर्चा का विषय नहीं रह गए है। भयंकर सूखा, बाढ़ और गर्मी की लहरें देख रहे हैं। आने वाले दशकों में जलवायु परिवर्तन तेज़ होने की संभावना है।
हमारे समाज और पर्यावरण के समक्ष चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। पर्यावरण और पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए सभी को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। ऐसी अपील भी उन्होंने की।

श्री बैस ने कहा कि सिम्बायोसिस जैसे विश्वविद्यालय के कारण वैश्विक अनुभव प्रदान करते हैं। यहां ज्ञान, अंतर्दृष्टि और कौशल प्राप्त करने के अलावा, आप सांस्कृतिक विविधता से भरे एक अच्छे वातावरण में भी रहते हैं। यह वातावरण व्यक्ति को अपने दृष्टिकोण का विस्तार करने में उदार बनाता है।

सिम्बायोसिस अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शां.ब. मुजुमदार ने कहा कि स्नातकों को डिग्री प्राप्त करने के बाद अपने देश लौटते समय महात्मा गांधी और गौतम बुद्ध के देश को याद करना चाहिए। पुणे जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा शासित ऐतिहासिक शहर को भी याद करें। इस देश में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का प्रतिनिधित्व करनेवाली सिम्बायोसिस संस्था को स्मृति के रूप में स्थायी रूप से जोड़ा जाना चाहिए। इस देश ने आपके व्यक्तित्व को आकार दिया है। अब समय आ गया है कि दुनिया हमारी संस्कृति का मूल्य समझे।

सिम्बायोसिस की प्रधान संचालिका तथा विश्वविद्यालय की प्र- कुलगुरू डॉ. विद्या येरवडेकर ने कहा कि इस विश्वविद्यालय में अफ्रीकी-एशियाई देशों के छात्र पढ़ते हैं, इसलिए स्नातक होने के बाद उन्हें उनके देश में बहुत सम्मान मिलता है। यहां शिक्षा के साथ-साथ इन छात्रों को विभिन्न देशों की विविधता और संस्कृति को भी समझने का मौका मिलता है। वे वैश्विक नागरिक, वैश्विक राजदूत बनते हैं। इस साल दुबई में सिम्बायोसिस कैंपस शुरू हो रहा है।
कुलगुरू डॉ. रामकृष्णन रमण व अंतर्राष्ट्रीय छात्र परिषद के अध्यक्ष बेबुकर सेक्का ने भी अपने विचार व्यक्त किए।


स्नातक समारोह में 26 विभिन्न देशों के 85 छात्रों को डॉक्टरेट, उपाधियाँ प्रदान की गईं। इस समारोह के अवसर पर एक स्मारिका का भी विमोचन किया गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्र प्रतिनिधियों ने अपने देश के झंडे राज्यपाल के पास प्रदान करके एकत्रित किए।

कार्यक्रम में सिम्बायोसिस के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के अधिष्ठाता, निदेशक और प्रमुख, विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय छात्र उपस्थित थे।

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