पाँच वर्षों में 1.25 लाख उद्यमियों को तैयार करने और 50,000 स्टार्टअप्स शुरू करने का लक्ष्य
मुंबई, अगस्त (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
आज हुई मंत्रिमंडल बैठक में महाराष्ट्र स्टार्टअप, उद्यमिता और नवाचार नीति 2025 को मंजूरी दी गई, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की। इस नीति के तहत राज्य में आने वाले 5 वर्षों में 1.25 लाख उद्यमी तैयार किए जाएंगे और 50,000 स्टार्टअप्स की स्थापना की जाएगी। इससे महाराष्ट्र स्टार्टअप्स और यूनिकॉर्न्स की संख्या में देश का अग्रणी राज्य बनेगा और रोजगार निर्माण व नवाचार क्षेत्र में राज्य की वैश्विक पहचान बनेगी।
इस नीति में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ महिला और युवा नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।
31 मई 2025 तक, महाराष्ट्र में 29,147 स्टार्टअप्स पंजीकृत हैं, जो देशभर के कुल स्टार्टअप्स का 18 प्रतिशत है – यानी देश में सर्वाधिक। इन स्टार्टअप्स के लिए एक प्रभावी इकोसिस्टम निर्मित करने हेतु यह समयोचित नई नीति लाई गई है। इस नीति में नवाचार, उद्यमिता और निवेश के लिए सक्षम माहौल बनाने पर जोर दिया गया है।
इस नीति की एक प्रमुख विशेषता है मुख्यमंत्री महा-फंड, जिसके अंतर्गत 500 करोड़ रुपये की निधि होगी, जिससे 25,000 प्रारंभिक चरण के उद्यमियों को मार्गदर्शन, इन्क्युबेशन और वित्तीय सहायता दी जाएगी।
राज्य भर के ITI, पॉलिटेक्निक और शैक्षणिक संस्थानों में माइक्रो इन्क्युबेटर स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक प्रशासकीय विभाग में प्रादेशिक नवाचार और उद्यमिता हब्स बनाए जाएंगे, जो AI, डीपटेक, फिनटेक, मेडटेक, साइबर सुरक्षा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित होंगे।
एक 300 एकड़ में फैली ‘महाराष्ट्र इनोवेशन सिटी’ स्थापित की जाएगी, जहां स्टार्टअप्स, कॉर्पोरेट्स, शैक्षणिक संस्थान और सरकार एक साथ कार्य करेंगे। यह इनोवेशन सिटी अनुसंधान और नवाचार का केंद्र बनेगी।
महाराष्ट्र स्टार्टअप वीक के अंतर्गत चयनित स्टार्टअप्स को सरकारी विभागों के साथ सीधे काम करने का अवसर मिलेगा, और उन्हें 25 लाख रुपये तक के पायलट कार्यादेश दिए जाएंगे। साथ ही, पेटेंट पंजीकरण, उत्पाद प्रमाणन, देश-विदेश के प्रदर्शनियों में भागीदारी के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। जिन स्टार्टअप्स को सार्वजनिक संस्थाओं या विश्वसनीय ग्राहकों से कार्यादेश मिलेंगे, उन्हें ऋण सहायता देने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी।
राज्य के हर विभाग को अपनी वार्षिक निधि का 0.5% नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए आरक्षित करना अनिवार्य होगा। इन सभी योजनाओं का क्रियान्वयन महाराष्ट्र राज्य नवाचार सोसायटी के माध्यम से किया जाएगा।
इस नीति के निर्माण में नागरिकों, स्टार्टअप्स, शैक्षणिक संस्थानों, इन्क्युबेटर्स, निवेशकों और विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी रही है। उनके सुझावों के आधार पर प्रादेशिक इन्क्युबेशन समर्थन, सरल प्रोत्साहन प्रक्रिया, डिजिटल साक्षरता और उद्यमिता कौशल विकास जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।
कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार विभाग को इस नीति का नोडल विभाग घोषित किया गया है। महाराष्ट्र राज्य नवाचार सोसायटी के माध्यम से इस नीति को लागू किया जाएगा। साथ ही, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में सोसायटी को निधि उपलब्ध कराने और सभी विभागों को अपनी निधि का 0.5% इस उद्देश्य के लिए देने की भी मंजूरी दी गई है।
महाराष्ट्र राज्य नवाचार सोसायटी की स्थापना 2017 में हुई थी। नई नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सोसायटी को सशक्त किया जाएगा। सोसायटी में सामान्य सभा (जनरल बॉडी) और नियामक मंडल (गवर्निंग काउंसिल) होंगे। मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष होंगे। इसके सदस्य उद्योग, योजना, वित्त, कृषि, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, सूचना व प्रौद्योगिकी, नगर विकास, पर्यावरण, परिवहन, स्कूली शिक्षा, उच्च व तकनीकी शिक्षा आदि विभागों के सचिव/प्रधान सचिव होंगे। उद्योग संगठनों, उद्यमियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। सामान्य सभा द्वारा लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन के लिए नियामक मंडल काम करेगा।
इस नीति के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), फिनटेक, एग्रीटेक, मेडटेक, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा, बायोटेक, स्पेसटेक, ब्लॉकचेन, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर, मोबिलिटी और डीपटेक जैसे उच्च क्षमता वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी।