मीडिया ने भारत छोड़ो आंदोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी : प्रो. कृपाशंकर चौबे
वर्धा, अगस्त (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे ने कहा है कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में मीडिया ने बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। प्रो. चौबे आज शाम कम्युनिकेशन टुडे द्वारा मीडिया और भारत छोड़ो आंदोलन विषय पर आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उषा मेहता और उनके साथियों ने मुंबई में कांग्रेस रेडियो नामक गुप्त रेडियो स्टेशन स्थापित किया और उस रेडियो ने 27 अगस्त 1942 से 12 नवंबर 1942 तक प्रतिदिन 42.34 मीटर शॉर्टवेव पर भारत छोड़ो आंदोलन की सच्ची खबरें, महात्मा गांधी से लेकर राम मनोहर लोहिया जैसे नेताओं के संदेश और आजादी का आह्वान लगातार प्रसारित किया। तब ब्रिटिश सरकार ने प्रेस पर कठोर सेंसरशिप लगा रखी थी फिर भी कांग्रेस रेडियो ने पत्रकारिता में अपूर्व साहस, तकनीकी दक्षता और देशभक्ति का परिचय दिया।
प्रो. चौबे ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन में प्रिंट मीडिया के पत्रकारों ने भी पेशेवराना सूझ-बूझ और साहस का परिचय दिया। प्रो. चौबे ने मनीषी संपादक नारायण दत्त का हवाला देते हुए कहा कि आठ अगस्त 1942 की रात मुंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस महासमिति के भारत छोड़ो प्रस्ताव का समर्थन करते हुए गांधी जी ने अपने भाषण में देशवासियों को ‘करो या मरो’ का संदेश दिया। अगली सुबह अधिवेशन स्थल पर ध्वजवंदन होना था। मुंबई के पत्रकारों को अंदेशा था कि रात के अंधेरे में ब्रिटिश सरकार गांधी जी एवं कांग्रेस के दूसरे नेताओं को गिरफ्तार करेगी। गांधी जी मलाबार हिल स्थित बिड़ला हाउस में ठहरे थे। बिड़ला हाउस के रास्ते में पुलिस की गारद तैनात थी। पत्रकारों ने आपस में मशविरा किया और एक योजना बनाई। मलाबार हिल की दोनों ढालों पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर एक-एक पत्रकार बैठ या लेट गया- कोई दूध बेचने वाले का भेष बनाकर तो कोई अखबार बेचने वाले के रूप में। नौ अगस्त की भोर में सुबह 4:30 बजे ज्यों ही पुलिस की गाड़ी गांधी जी को गिरफ्तार करके बिड़ला हाउस के फाटक से निकली, पहले पत्रकार ने हाथ से एक खास इशारा दूसरे पत्रकार को किया, दूसरे ने तीसरे को। इस तरह चंद मिनटों में इशारों की तार-बरकी से खबर पहाड़ी के इस पार पहुँच गई और वहाँ से फोर्ट इलाके के अखबारों के दफ्तरों में और वहाँ से सारे मुंबई शहर में फैल गई।
प्रो. चौबे ने कहा कि इंडियन एक्सप्रेस, आज, विशाल भारत, हरिजन जैसी पत्र-पत्रिकाओं ने भारत छोड़ो आंदोलन की खबरें साहस के साथ प्रकाशित की। कम्युनिकेशन टुडे के संपादक प्रो. संजीव भानावत से प्रास्ताविक वक्तव्य दिया।